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Sunday, June 21, 2020

बोलिविया में बच्चों के पास न मोबाइल, न इंटरनेट; पढ़ाई से दूर हो रहे थे, शिक्षक ने दो पहियों पर स्कूल उनके घर पहुंचा दिया

बोलिविया के बीहड़ इलाकों और उबड़-खाबड़ रास्तों पर इन दिनों एक शख्स साइकिल के पीछे वाइट बोर्ड टांगे कस्बे दर कस्बे नजर आता है। ये शख्स विल्फ्रेडो नेग्रेटे हैं, जो दूर दराज के कस्बों में बच्चों को पढ़ाने के लिए कई किमी तक जाते हैं। कहीं साइकिल नहीं चल पाती तो पैदल ही जाना पड़ता है।

दरअसल दक्षिण अमेरिकी देश बोलिविया में भी कोरोना के कारण मार्च से ही स्कूलों पर ताले लटके हैं। संकट जल्द खत्म न होते देख सरकार ने बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई कराने का सुझाव दिया। स्कूलों ने इसकी शुरुआत भी की। पर नेग्रेटे की क्लास में ही 19 में से 13 बच्चों के पास मोबाइल और इंटरनेट की व्यवस्था नहीं है।

नेग्रेट ने साइकिल में ट्रॉली जोड़ी और निकल पड़े पढ़ाने के लिए

इससे वे पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे। नेग्रेट को जब इस बात का पता चला, तो उन्होंने अपनी साइकिल में एक ट्रॉली जोड़ ली, उसमें वाइट बोर्ड फिट कर लिया और निकल पड़े बच्चों को पढ़ाने के लिए। उन्होंने अन्य स्कूलों के बच्चों की भी पढ़ाई में मदद की।

नेग्रेटे कहते हैं कि इतना ही काफी है कि बच्चों की पढ़ाई हो पा रही है

हालांकि, इस काम के लिए उन्हें कोई अतिरिक्त मेहनताना नहीं मिल रहा, पर नेग्रेटे कहते हैं कि उनके लिए बस इतना ही काफी है कि बच्चों की पढ़ाई हो पा रही है। वो बताते हैं कि अगर बच्चे मोबाइल की सुविधा जुटा भी लें तो एक्विल और करीबी कस्बों में बैंडविड्थ इतनी कम है कि वे होमवर्क तक डाउनलोड नहीं कर सकते। इसलिए मैंने दो पहियों के जरिए स्कूल उन तक पहुंचा दिया।

नेग्रेटे घर में भी पढ़ाते हैं,बड़ी संख्या में आसपास के बच्चे आते हैं

बचे समय में नेग्रेटे घर में भी पढ़ाते हैं। बड़ी संख्या में आसपास के बच्चे आते हैं। क्लास में पढ़ने वाले एक छात्र की मां ओवल्डिना पोर्फिडिओ बताती हैं कि हम बच्चों की पढ़ाई को लेकर बहुत फिक्रमंद थे, पर नेग्रेटे ने समस्या हल कर दी। वो अपने दोनों बच्चों को रोजाना कई किमी दूर से पढ़ाने के लिए लेकर आती हैं।



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नेग्रेट को जब बच्चों की दिक्कतों के बारे में पता चला तो उन्होंने अपनी साइकिल में एक ट्रॉली जोड़ ली, उसमें वाइट बोर्ड फिट कर लिया और निकल पड़े बच्चों को पढ़ाने के लिए।


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