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Saturday, May 23, 2020

स्वीडन: सोशल डिस्टेंसिंग की अपील की लेकिन इसे लेकर सख्ती नहीं दिखाई, 30% ज्यादा मौतें हुईं

मार्च के अंत तक, यूरोप के लगभग हर देश ने स्कूलों और व्यवसायों को बंद कर दिया था, यात्रा को प्रतिबंधित कर दिया था और नागरिकों को घर पर रहने का आदेश दिया था। लेकिन, एक देश ऐसा भी था जिसने ऐसा कुछ नहीं किया। वह है स्वीडन।

इसने लॉकडाउन के बजाय लोगों को पार्क, रेस्तरांऔर काम पर जाने की इजाजत दे रखी है।हालांकि, सोशल डिस्टेंसिंग की अपील की थी, लेकिन इसे लेकर सख्त प्रावधान नहीं किए। कोरोनोवायरस प्रकोप के बीच कुछ अमेरिकी राजनेताओं ने स्वीडन के इस फैसले की तारीफ की और वे स्वीडन को अमेरिका के लिए एक संभावित मॉडल के रूप में देखने लगे।

विशेषज्ञ इसे भारी और ऐतिहासिक भूल बता रहे

हालांकि, स्वीडन ने इटली, स्पेन और ब्रिटेन में फैल रहे प्रकोप की विनाशकारी मार से खुद को बचा लिया है, लेकिन इसके मृत्यु दर के आंकड़ों में भी असाधारण वृद्धि देखी गई है। अब विशेषज्ञ इसे भारी और ऐतिहासिक भूल बता रहे हैं।

आम दिनों की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक लोगों की मौत

जब पूरी दुनिया में लॉकडाउन हो रहा था, तो स्वीडन के करीब 2,000 साइंटिस्ट, डॉक्टर और महामारी विशेषज्ञों ने देश में सख्त लॉकडाउन लगाने की अपील की थी, जिसे सरकार ने खारिज कर दिया था। नतीजा यह हुआ कि स्वीडन में कोरोना महामारी के दौरान आम दिनों की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक लोगों की मौत हो गई।

मौतों की दर पड़ोसी देश नॉर्वे, फिनलैंड और डेनमार्क की तुलना में अधिक

मौतों की यह दर पड़ोसी देश नॉर्वे, फिनलैंड और डेनमार्क की तुलना में अधिक है, जबकि अमेरिका में कोरोना मृत्यु दर के लगभग बराबर है। स्वीडन में संक्रमण के 33,188 मामले आ चुके हैं, जबकि 3,992 लोगों की मौत हो चुकी है, जो कोरोना से हुई मृत्यु दर के हिसाब से दुनिया में सबसे ज्यादा है।



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हालांकि, स्वीडन ने इटली, स्पेन और ब्रिटेन में फैल रहे प्रकोप की विनाशकारी मार से खुद को बचा लिया है, लेकिन इसके मृत्यु दर के आंकड़ों में भी असाधारण वृद्धि देखी गई है।


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